कहानी : भगवान की इच्छा

 कहानी : भगवान की इच्छा


नदी में एक नाविक कुछ  लोगो को नदी पर करवा रहा था। इन सवारी में एक साधु भी बैठा हुआ था।


Kahani : bhagwan ki ichcha


सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक नदी में कुछ लहरें उठने लगी तब नाविक ने कहा की तैयार हो जाओ क्योंकि शायद नाव डूबने वाली है जिसको जिसको तैरना आता है अच्छी बात है वरना बाकी के लोग प्रार्थना करो।


नाविक की बात सुनकर साधु अपने पास रखे कमंडल से नदी का पानी भरकर नाव में डालने लगा उसको ऐसा करते देखा नाविक और बाकी के लोग आश्चर्य से देखने लगे। कुछ देर बाद ही नदी की लहरें शांत हो गई और नाविक ने कहा भगवान की इच्छा से अब हम सब बस जाएंगे किसी को डरने की जरूरत नहीं है।


यह बात सुनते ही साधु ने कमंडल से डाला हुआ पानी नाव से निकाल कर वापस नदी में फेंक दिया।


साधु को ऐसा करते देख नावीक ने साधु से पूछा कि बाबा नाव डूब रही थी तब आपने नाव में पानी डाला और अब जब नाव संभल गई है तो आपने पानी निकाल दिया इसमें आपकी क्या इच्छा थी?


साधु ने मुस्कुराते हुए कहा कि मेरी कोई भी इच्छा नहीं है! जब नाव डूबने लगा रही थी तब नाव को डुबाने में ही भगवान की इच्छा है यह सोचकर मैं  उनके काम में हाथ बटाने के लिए पांच कमंडल भर के पानी डाल दिया!


 और जब नाव बच गई तब उनकी इच्छा नाव को बचाने में है यह समझ कर मैंने अपनी इच्छा उनकी इच्छा से मिला दी और नाव से पानी निकाल दिया। साधु की कोई इच्छा नहीं होती भगवान की इच्छा ही उनकी इच्छा होती है।

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