मेहनती समझदार बच्चे की कहानी | Moral story

 मेहनती समझदार बच्चे की कहानी


नमस्कार दोस्तों..आपको ये छोटी सी कहानी से ऐसा सीखने को मिलेगा जिसे आप अपने जीवन में स्थापित करना चाहेंगे।


MOral story in Hindi


 कल मैं रोहिणी सेक्टर-18,19 मेट्रो स्टेशन, नई दिल्ली से निकल कर जा रहा था की तभी मैंने फूटपाथ पर एक बच्चे को देखा, जो भुट्टे बेच रहा था।   उम्र से वह 9-10 साल होगा!


 मैं अपने आप को उससे बात करने से रोक नहीं सका मैं उसके पास गया और पूछा:-


 मैं: तुम देर रात तक भुट्टे क्यों बेच रहे हो?


 वह/दीपक: भाई, मेरी माँ और पिताजी अब इस दुनियां में नहीं हैं, इसलिए मैं अपने गुजर-बसर लिए इस काम से कुछ पैसे कमाता हूँ!


 मैं: पर क्या तुम पढ़ाई करते हो या नहीं?  तुम स्कूल जाते तो ना?


 वह: सच्ची मुस्कान के साथ!!  हां हां!  मैं सरकारी स्कूल में जाता हूं जो मेरे घर के बहुत करीब है और मुझे वहा जाना भी अच्छा लगता है।


 मैं: इस काम से तुम एक दिन में कितना कमा लेते हों?


 वह: दिन के  50 या 70 रुपये कमाता लेता हूं।


 मैं: तुम ये मक्का कहां से खरीदते हो?


 वह: मेरे पहचान का एक आदमी है जो मुझे बेचने के लिए मक्का देता है लेकिन वह प्रति मक्का 6 रुपये कमीशन के रूप में लेता है।


 मैं: खूब पढ़ो और मेहनत करो।


दोस्तों,आज उस मासूम बच्चे ने मुझे जिंदगी का असली मतलब सिखाया।  एक दस साल का बच्चा अपनी इतनी बुरी परिस्थिति के बावजूद  कड़ी मेहनत का रास्ता चुनता है बजाय नई दिल्ली जैसे शहर में भीख  मांगना।  इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसकी मां और पिता जीवित नहीं हैं लेकिन भगवान उसके साथ है। 


 सीख:- कभी भी पीछे मुड़कर न देखें, सभी बुरी परिस्थितियों को छोड़कर,भुलाकर आगे बढ़ते रहे । इस बात को अगर एक बच्चा समझ सकता है कि भीख मांगना जीवन जीने का विकल्प नहीं है तो हम क्यों नहीं समझ सकते?  78 लाख (लगभग एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में भिखारियों को संख्या) भारतीय क्यों नहीं समझते?  अब बदलाव का समय आ गया है!

क्रेडिट: केशव कुमार

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