चतुर मछली
एगांव में एक मछुआरा रहता था । वह अपने गांव के पास वाली नदी में हर दिन जाकर मछलियां पकड कर उन्हें बेचकर पैसे कमाता था और इसी तरह उसका गुजारा चलता था ।
ऐसे ही एक दिन वह मछुआरा मच्छलियां पकड़ने नदी पर गया वहां उसने अपने जाल को पानी में बिछाया दिया । काफी देर बैठने के बाद उसने अपने जाल में थोड़ी हलचल महसूस की , उसे लगा की जाल में बहुत सारी मछलियां फंसी होंगी इसलिए उसने जाल को बाहर निकाल दिया जब बाहर निकाला तो उसने देखा कि जाल में कुछ भी नहीं था !लेकिन जब उसने गौर से देखा तो एक छोटी सी मछली जाल में फंसी हुई थी उसे यह देखकर बहुत अफसोस हुआ उसने सोचा कि आज तो ज्यादा मछलीयां ही नहीं फसी आज मुझे पैसे नहीं मिलेंगे तो उसने उस छोटी मछली को बाहर निकालने लगा । जब वह ऐसा करने लगा तब वह छोटी मछली बोली की है मछुआरे मुझे छोड़ दो मुझे पानी के बाहर मत निकालो , बिना पानी के मैं मर जाऊंगी । लेकिन मछुआरा उसकी बात पर ध्यान नहीं देते हुए उस मछली को बाहर निकालने के लिए अपने जाल को खींचने लगा । थोड़ा सोचने के बाद मछली फिर बोली ये मछुआरे मुझे आज छोड़ दो ,मैं अपने घर जाऊंगी मेरे जितने सारे दोस्त है उनको किसी तरह झूठ बोलकर कल इसी जगह पर लेकर आऊंगी तो इससे तुम्हारा फायदा हो जाएगा और तुम्हें ढेर सारी मछलियां एक साथ मिल जाएंगी । मछुआरे ने सोचा यह तो अच्छी बात है अगर आज मैं इस छोटी सी एक अकेली मछली को जाने देता हूं तो कल मुझे ढेर सारी मछलिया बिना मेहनत के मिल जाएगी । इस लालच की वजह से मछुआरे ने उस मछली को जाने दिया । पानी में मुक्त होते ही मछली बड़ी तेजी से तैरते हुए पानी के अंदर गहराई में चली गई और फिर कभी वापस लौट कर नहीं ! अगले दिन बिचारा मछुआरा यह सोच कर कि आज उसे बहुत सारी मछलियां मिलने वाली है पूरा दिन नदी के किनारे जाल बिछाए बैठा रहा।
इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
दोस्तों नन्हे मछली की तरह ही हम सबके जीवन में ऐसे कई कई सारी मुश्किल परिस्थिति आएंगी और ऐसी परिस्थितियों में हमें अपना होश ना खोते हुए नन्ही मछली की तरह ही चतुराई से काम लेना होगा तभी हम उन परिस्थितियों से निकल पाएंगे।
