गतिशील पानी पीने लायक होता है,जो पानी स्थिर होता है उसमे अकसर कीचड़ पनपता है.
यह लाइने बहुत महत्वपूर्ण है उन लोगों के लिए जो हमेशा दुखी रहते हैं. चलो इसी बात को हम एक बहुत ही बेहतरीन महान गौतम बुद्ध की कहानी से समझते हैं.
यह बात है 563 ईसा पूर्व की जो वहां गौतम बुद्ध का समय भी कहा जाता है. गौतम बुद्ध हमेशा अलग-अलग गांव जाकर वहां के लोगों को जीवन का सच्चा ज्ञान बांटते थे. ऐसे ही किसी गांव में गौतम बुद्ध धर्म सभा लगाकर वहां के लोगों का अज्ञान दूर कर रहे थे.
उसी गांव में बहुत निर्धन और दुखी आदमी रहता था जो इस सभा के बाहर खड़ा होकर बड़े ध्यान से देखता रहता था. वह देखता था की जब भी कोई अशांत और दुखी आदमी इस सभा के भीतर जाता है तब ऐसा लगता है जैसे वो दुनिया का सबसे बदनसीब इंसान हो मगर लौटते समय उसके मुख का तेज और खुशी दुनिया के सबसे खुशनसीब और सुखी इंसानों वाली होती थी!
यह सब देख कर वह निर्धन और दुखी आदमी बहुत आश्चर्यचकित होता था और उसके मन में यही खयाल चलता रेहता कि एक बार वह खुद भी अंदर जाकर देखेगा. जब कई दिनों तक ऐसा होता रहा तो उससे अब रहा नहीं गया और वह उस सभा के भीतर जा पहुंचा इस सोच के साथ की अपने दुख और निर्धनता का निवारण करके सुखी हो पाएगा.
सभा में जाकर उसने देखा कि गांव के कई सारे लोग अपनी अपनी समस्याएं लेकर बारी-बारी से भगवान बुद्ध के पास जा रहे थे और अपनी समस्याएं उन्हें बता रहे थे.भगवान बुध सब की समस्याएं बड़े ध्यान से सुनते और हर किसी को उनका कारण और निवारण भी बताते जिन्हें सुनकर वह लोग खुश हो जाते हैं.
जैसे ही उस निर्धन दुखी आदमी की बारी आई तो वह भी भगवान बुद्ध के चरणों में पहुंच गया. उसने अपनी गरीबी और निर्धनता का कारण पूछते हुए भगवान बुद्ध से कहा कि मेरे इस गांव में सभी लोग अमीर है,सब के पास बहुत धन है जिससे वह सुखी भी है. तो भगवान ने मेरे साथ ही ऐसा क्यों किया मुझे ही इतना निर्धन और गरीब क्यों बनाया?
गौतम बुद्ध ने उस व्यक्ति की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा," तुम ने अपने जीवन में कभी भी किसी को कुछ भी नहीं दिया इसीलिए तुमने निर्धन और गरीब हो!" यह सुनकर उस गरीब को और भी ज्यादा आश्चर्य हुआ उसने कहा,"गुरु जी आप ये क्या केह रहे हैं! भला मैं किसी को क्या दे सकता हूं? मेरा खुद का गुजारा मांग मांग के चलता हैं."
उस व्यक्ति की ऐसी बात और विचार सुनकर गौतम बुद्ध ने उससे कहां,"तुम सिर्फ निर्धन ही नहीं बल्कि बड़े अज्ञानी भी हो. भगवान ने तुम्हें क्या कुछ नहीं दिया है मुस्कान दी है जिससे तुम दूसरों की जीवन में आशा की किरने जगा सकते हो . वाणि दी है जिससे तुम मीठे बोल बोलकर लोगों का दुख- दर्द और खुशियां बांट सकते हो और दो मजबूत हाथ दिए हैं जिससे तुम लोगों की सहायता कर सकते हो. अब तुम ही बताओ जब तुम्हारे पास इतना कुछ है तो तुम निर्धन कैसे हुए? गरीबी और निर्धनता यह तुम्हारे मन का सिर्फ एक भ्रम है इसे तुम जितनी जल्दी दूर करोगे उतनी ही जल्दी तुम सुखी और संतुष्ट हो सकोगे."
वह व्यक्ति अब गौतम बुद्ध से ज्ञान प्राप्त करके अपनी दुख और दरिद्रता का कारण समझ चुका था. अब उसकी सोच बदल चुकी थी तो उसके चेहरे पर भी वही चमक और सुख दिखने लगा जो वह सभा से बाहर जाते लोगों के चेहरे पर देखा करता था!
दोस्तों शुरू की दो लाइनों का अर्थ शायद आपको समझ में आया होगा गतिशील पानी यानी वक्त के साथ बदलते सकारात्मक विचार और स्थिर पानी याने नकारात्मक पुरानी सोच जो हमेशा आपको दुख और असंतुष्टि का एहसास कराती रहती है. इसीलिए जो विचार हमें दुखी करते हैं हमें उन्हें बदल देना चाहिए. क्योंकी हो सकता है वह केवल एक भ्रम हो.